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- 16/08/1975
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- चार वेद: नाम, महत्व और उनके रहस्यवेद हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र ग्रंथ हैं, जिन्हें श्रुति साहित्य भी कहा जाता है। ‘वेद’ शब्द का अर्थ है ज्ञान। माना जाता है कि यह ज्ञान स्वयं ईश्वर ने ऋषियों को प्रदान किया था। यही कारण है कि वेद केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। वेदों में ब्रह्मांड, ज्योतिष, औषधि, खगोल, गणित, दर्शन, चिकित्सा, और जीवन जीने के मूल...0 Комментарии 0 Поделились 1546 ПросмотрыВойдите, чтобы отмечать, делиться и комментировать!
- सनातन धर्म मंदिर: परंपरा और महत्व की झलकसनातन धर्म मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का जीवंत प्रतीक है। सनातन संस्कृति में मंदिर को प्रार्थना के स्थान से भी आगे बढ़कर ऊर्जा, शांति और जीवन मार्गदर्शन का केंद्र माना गया है। प्राचीन काल से ही मंदिर मानव जीवन को आत्मा और परमात्मा से जोड़ने का माध्यम रहे हैं। यहाँ आकर भक्त न केवल पूजा करते हैं, बल्कि वे अपने जीवन में सकारात्मकता, शांति और संतुलन...0 Комментарии 0 Поделились 1529 Просмотры1
- विष्णु पुराण: ज्ञान और भक्ति का अनमोल ग्रंथविष्णु पुराण अष्टादश महापुराणों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राचीन ग्रंथ है। इसे ऋषि पराशर ने रचा था। यह ग्रंथ न केवल भगवान विष्णु की महिमा का वर्णन करता है, बल्कि इसमें सृष्टि, भूगोल, ज्योतिष, धर्म, कर्मकांड, राजवंश और भगवान कृष्ण के दिव्य चरित्र का भी विस्तार से उल्लेख है। विष्णु पुराण का आकार सभी 18 पुराणों में सबसे छोटा माना जाता है, लेकिन इसकी गहराई और महत्व अद्वितीय है। विष्णु पुराण...0 Комментарии 0 Поделились 1657 Просмотры
- चार धाम यात्रा: एक संपूर्ण गाइड यात्रियों के लिएचार धाम यात्रा भारत की सबसे पवित्र और लोकप्रिय तीर्थयात्राओं में से एक है। उत्तराखंड की हिमालयी वादियों में स्थित यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को सामूहिक रूप से चार धाम कहा जाता है।हिंदू मान्यता के अनुसार, जो भी श्रद्धालु चार धाम यात्रा पूरी करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि हर साल लाखों भक्त इस यात्रा को करने आते हैं। चार धाम यात्रा के चार पवित्र धाम 1....0 Комментарии 0 Поделились 1554 Просмотры
- शिवस्तुति पाठ: भक्ति और अध्यात्म की अनोखी साधनाशिवस्तुति पाठ केवल भक्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह साधक को भगवान शिव से आध्यात्मिक रूप से जोड़ने वाली अनूठी साधना है। प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनि और भक्त इस स्तुति के माध्यम से मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति और शिव कृपा प्राप्त करते आए हैं। शिवस्तुति का ऐतिहासिक महत्व कहा जाता है कि आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा रचित शिवस्तुति को पढ़ने से तुरंत शिवकृपा प्राप्त होती है। इस स्तुति को श्रेष्ठतम स्थान...0 Комментарии 0 Поделились 1964 Просмотры
- उज्जैन भस्म आरती बुकिंग कैसे करें? पूरी जानकारीमहाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन को बारह ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान प्राप्त है। यहाँ हर दिन सुबह होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए लाखों श्रद्धालु आते हैं। यह आरती भगवान शिव के उस अनूठे स्वरूप को दर्शाती है, जब महाकाल को भस्म से स्नान कराया जाता है। इस लेख में हम जानेंगे – भस्म आरती बुकिंग कैसे करें, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया, टिकट की कीमतें, नियम और जरूरी जानकारियाँ। भस्म...0 Комментарии 0 Поделились 1820 Просмотры
- ओंकारेश्वर धाम: पौराणिक रहस्य और दर्शन का अनुभवओंकारेश्वर धाम (Omkareshwar Jyotirlinga) मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के तट पर स्थित एक पवित्र ज्योतिर्लिंग है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और नर्मदा नदी के बीच बने मांधाता द्वीप पर बसा है, जिसका आकार पवित्र ‘ॐ’ जैसा दिखाई देता है। यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के कारण भी अत्यंत प्रसिद्ध है। पौराणिक मान्यताएँ और रहस्य राजा...0 Комментарии 0 Поделились 2340 Просмотры
- त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग कहाँ है? कथा और महत्वभगवान शिव को समर्पित 12 ज्योतिर्लिंग सनातन धर्म में सर्वोच्च स्थान रखते हैं। इन्हीं में से एक है त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (Trimbakeshwar Jyotirlinga), जो महाराष्ट्र के नासिक जिले से लगभग 30 किलोमीटर दूर त्र्यंबक नगर में स्थित है। धार्मिक मान्यता है कि यहाँ पूजा और जलाभिषेक करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग कहाँ स्थित...0 Комментарии 0 Поделились 2355 Просмотры
- श्रीसूक्त का महत्व क्या है? लक्ष्मी प्राप्ति का मंत्रश्रीसूक्त (Shri Suktam) ऋग्वेद का एक अत्यंत पवित्र स्तोत्र है जो मां लक्ष्मी की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इसका नियमित पाठ साधक को धन-धान्य, सुख-समृद्धि, यश और सौभाग्य प्रदान करता है। शास्त्रों में कहा गया है कि श्रीसूक्त का पाठ करने से दरिद्रता दूर होती है और घर-परिवार में स्थिर लक्ष्मी का वास होता है। श्रीसूक्त की उत्पत्ति और अर्थ “श्री” का अर्थ है लक्ष्मी। श्रीसूक्त...0 Комментарии 0 Поделились 2084 Просмотры
- आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कब करें? लाभ और नियमMore information माना गया है । वे समस्त ब्रह्मांड की उ जीवनदाता हैं। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को पिता , आत्मविश्वास , आरोग्यता , यश और तेज का कारक बताया गया है। इनकी आराधना करने से जीवन में सकि ऊर्जा का संचार होता है। More information More information More information More information रावण More...0 Комментарии 0 Поделились 2198 Просмотры
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